इतिहास में संत कबीर नगर
संत कबीर के दोहों और उनके संदेश का ही असर रहा कि खलीलुर्रहमान ने सर्व धर्म समभाव की भावना के साथ खलीलाबाद नगर बसाया जिसे वर्ष 1997 में ज़िला मुख्यालय का दर्ज़ा मिला। खलीलुर्रहमान मुग़ल शासन काल में दिल्ली में रहते थे, जहां उनकी मुलाकात मुग़ल बादशाह औरंगजेब से हुई। खलीलुर्रहमान की बुद्धिमता से प्रभावित होकर औरंगजेब ने उन्हें गोरखपुर परिक्षेत्र का चकलेदार एवं क़ाज़ीनियुक्त कर दिया। खलीलुर्रहमान ने गोरखपुर और बस्ती के बीच खलीलाबाद क़स्बा बसाया। वर्ष 1737 में उन्होंने शाही किला बनवाया। किले के अंदर मस्जिद का निर्माण भी कराया गया। खलीलुर्रहमान ने अपने पुश्तैनी गांव मगहर स्थित जामा मस्जिद से शाही किले तक आने-जाने के लिए सुरंग मार्ग भी बनवाया जो नौ किलोमीटर लंबा और 15 फीट चौड़ा है। इसी रास्ते से वह अपनी टमटम पर बैठकर किले तक जाते थे और वहां फरियादियों की दिक्कतोंको सुनकर इंसा़फ करते थे। किले और शाही रास्ते की सुरक्षा के लिए हर समय पहरेदारों की तैनाती रहती। गोरखपुर और बस्ती के बीच स्थित शाही किले खलीलाबाद को बारी (मुख्यालय) का दर्ज़ा हासिल था। मुग़ल शासनकाल में गोरखपुर का मुख्यालय खलीलाबाद ह...